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श्रीरामगीता • अध्याय 1 • श्लोक 60
विज्ञानमेतदखिलं श्रुतिसारमेकं वेदान्तवेदचरणेन मयैव गीतम् । यः श्रद्धया परिपठेद्गुरुभक्तियुक्तो मद्रूपमेति यदि मद्वचनेषु भक्तिः ॥ ॥ इति श्रीमदध्यात्मरामायणे उमामहेश्वरसंवादे उत्तरकाण्डे पञ्चमः सर्गः ॥
यह अद्वितीय ज्ञान समस्त श्रुतियों का एकमात्र सार है। इसे वेदान्तवेद्य भगवत्पाद मैंने ही कहा है। जो गुरुभक्तिसम्पन्न पुरुष इसका श्रद्धापू्वक पाठ करेगा, उसकी यदि मेरे वचनों में प्रीति होगी तो वह मेरा ही रूप हो जायगा।
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