आदौ च मध्ये च तथैव चान्ततो
भवं विदित्वा भयशोककारणम् ।
हित्वा समस्तं विधिवादचोदितं
भजेत्स्वमात्मानमथाखिलात्मनाम् ॥
संसार को आदि, अन्त और मध्य में सब प्रकार भय और शोक का ही कारण जानकर समस्त वेदविहित कर्मों को त्याग दे तथा सम्पूर्ण प्राणियों के अन्तरात्मारूप अपने आत्मा का भजन करे।
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