मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
श्रीरामगीता • अध्याय 1 • श्लोक 51
एवं सदाभ्यस्तसमाधियोगिनो निवृत्तसर्वेन्द्रियगोचरस्य हि । विनिर्जिताशेषरिपोरहं सदा दृश्यो भवेयं जितषड्गुणात्मनः ॥
इस प्रकार जो निरन्तर समाधियोग का अभ्यास करता है, जिसके सम्पूर्ण इन्द्रियगोचर विषय निवृत्त हो गये हैं तथा जिसने काम-क्रोधादि सम्पूर्ण शत्रुओं को परास्त कर दिया है, उस छठहों इन्द्रियों (मन और पाँचों ज्ञानेन्द्रियों ) को जीतने वाले महात्मा को मेरा निरन्तर साक्षात्कार होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
श्रीरामगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

श्रीरामगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें