मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
श्रीरामगीता • अध्याय 1 • श्लोक 46
पूर्वं समाधेरखिलं विचिन्तये- दोङ्कारमात्रं सचराचरं जगत् । तदेव वाच्यं प्रणवो हि वाचको विभाव्यतेऽज्ञानवशान्न बोधतः ॥
समाधि प्राप्त होने के पूर्व ऐसा चिन्तन करे कि सम्पूर्ण चराचर जगतू केवल ओंक्‍कार मात्र है। यह संसार वाच्य है और ओंकार इसका वाचक है। अज्ञान के कारण ही इसकी प्रतीति होती है। ज्ञान होने पर इसका कुछ भी नहीं रहता।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
श्रीरामगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

श्रीरामगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें