विश्वं यदेतत्परमात्मदर्शनं
विलापयेदात्मनि सर्वकारणे ।
पूर्णश्चिदानन्दमयोऽवतिष्ठते
न वेद बाह्यं न च किञ्चिदान्तरम् ॥
यह विश्व परमात्मस्वरूप है, ऐसा समझकर इसे सबके कारणरूप आत्मा में लीन करे; इस प्रकार जो पूर्ण चिदानन्दस्वरूप से स्थित हो जाता है, उसे बाह्य अथवा आन्तरिक किसी भी वस्तु का ज्ञान नहीं रहता।
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