मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
श्रीरामगीता • अध्याय 1 • श्लोक 43
एवं सदात्मानमखण्डितात्मना विचारमाणस्य विशुद्धभावना । हन्यादविद्यामचिरेण कारकै रसायनं यद्वदुपासितं रुजः ॥
इस प्रकार सदा आत्मा का अखण्डवृत्ति से चिन्तन करने वाले पुरुष अन्तः:करण में उत्पन्न हुई विशुद्ध भावना तुरन्त ही कारकादि के सहित अविद्या का नाश कर देती है, जिस प्रकार नियमानुसार सेवन की हुई ओषधि रोग को नष्ट कर डालती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
श्रीरामगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

श्रीरामगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें