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श्रीरामगीता • अध्याय 1 • श्लोक 41
प्रकाशरूपोऽहमजोऽहमद्वयो- ऽसकृद्विभातोऽहमतीव निर्मलः । विशुद्धविज्ञानघनो निरामयः सम्पूर्ण आनन्दमयोऽहमक्रियः ॥
मैं प्रकाशस्वरूप, अजन्मा, अद्वितीय, निरन्तर, भासमान, अत्यन्त निर्मल, विशुद्ध विज्ञानघन, निरामय, क्रियारहित और एकमात्र आनन्दस्वरूप हूँ।
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