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श्रीरामगीता • अध्याय 1 • श्लोक 4
श्रुत्वाथ सौमित्रवचोऽखिलं तदा प्राह प्रपन्नार्तिहरः प्रसन्नधीः । विज्ञानमज्ञानतमःप्रशान्तये श्रुतिप्रपन्नं क्षितिपालभूषणः ॥
श्रीलक्ष्मणजी के ये सब वचन सुनकर शरणागतवत्सल भूपालशिरोमणि भगवान्‌ राम सुनने के लिये उत्सुक हुए लक्ष्मण को उनके अज्ञानान्धकार का नाश करने के लिये प्रसन्‍नचित्त से ज्ञानोपदेश करने लगे।
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