मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
श्रीरामगीता • अध्याय 1 • श्लोक 39
गुरोः सकाशादपि वेदवाक्यतः सञ्जातविद्यानुभवो निरीक्ष्य तम् । स्वात्मानमात्मस्थमुपाधिवर्जितं त्यजेदशेषं जडमात्मगोचरम् ॥
अग्नि से तपे हुए लोहे के समान चिदाभास, साक्षी आत्मा तथा बुद्धि के एकत्र रहने से परस्पर अन्योन्याध्यास होने के कारण क्रमश: उनकी चेतनता और जडता प्रतीत होती है। (अर्थात्‌ जिस प्रकार अग्नि से तपे हुए लोहपिण्ड में अग्नि और लोहे का तादात्म्य हो जाने से लोहेका आकार अग्नि में और अग्नि की उष्णता लोहे में दिखायी देने लगती है, उसी प्रकार बुद्धि और आत्मा का तादात्म्य हो जाने से आत्मा की चेतनता बुद्धि आदि में और बुद्धि आदि की जडता आत्मा में प्रतीत होने लगती है । इसलिये अध्यासवश बुद्धि से लेकर शरीरपर्यन्त अनात्म-वस्तुओं को ही आत्मा मानने लगते हैं)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
श्रीरामगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

श्रीरामगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें