इन "तत्" और "त्वम्" पदों में एकरूप होने के कारण जहतीलक्षणा नहीं हो सकती और परस्पर विरोध होने के कारण अजहल्लक्षणा भी नहीं हो सकती। इसलिये "सो5यम्" (यह वही है) इन दोनों पदों के अर्थ की भाँति इन "तत्" और "त्वम्" पदों में भी भागत्यागलक्षणा ही निर्दोषता से हो सकती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
श्रीरामगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
श्रीरामगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।