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श्रीरामगीता • अध्याय 1 • श्लोक 24
प्रत्यक्परोक्षादि विरोधमात्मनो- र्विहाय सङ्गृह्य तयोश्चिदात्मताम् । संशोधितां लक्षणया च लक्षितां ज्ञात्वा स्वमात्मानमथाद्वयो भवेत् ॥
इन दोनों (जीवात्मा और परमात्मा) में जीवात्मा प्रत्यक्‌ (अन्तःकरण का साक्षी) है और परमात्मा परोक्ष (इन्द्रियातीत) है, इस (वाच्यार्थरूप) विरोध को छोड़कर और लक्षणावृत्ति से लक्षित उनकी शुद्ध चेतनता को ग्रहणकर उसे ही अपना आत्मा जाने और इस प्रकार एकीभाव से स्थित हो।
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