यह नियम ही है कि प्रत्येक वाक्य का अर्थ जानने में पहले उसके पदों के अर्थ का ज्ञान ही कारण है। (इस “तत्त्वमसि” महावाक्य के) "तत्" और "त्वम्" पद क्रम से परमात्मा और जीवात्मा के वाचक हैं और "असि" उन दोनों की एकता करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
श्रीरामगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
श्रीरामगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।