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श्रीरामगीता • अध्याय 1 • श्लोक 20
विद्यासमत्वेन तु दर्शितस्त्वया क्रतुर्न दृष्टान्त उदाहृतः समः । फलैः पृथक्त्वाद्बहुकारकैः क्रतुः संसाध्यते ज्ञानमतो विपर्ययम् ॥
और तुमने जो ज्ञान की समानता में यज्ञादि का दृष्टान्त दिया सो ठीक नहीं है, क्योंकि उन दोनों के फल अलग-अलग हैं। इसके अतिरिक्त यज्ञ तो (होता, ऋत्विकू, यजमान आदि) बहुत-से कारकों से सिद्ध होता है और ज्ञान इससे विपरीत है (अर्थात्‌ वह कारकादि से साध्य नहीं है)।
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