जिस समय परमात्मा और जीवात्मा के भेद को दूर करने वाला प्रकाशमय विज्ञान अन्तःकरण में स्पष्टतया भासित होने लगता है। उसी समय आत्मा के लिये संसार-प्राप्त की कारण माया अनायास ही कारकादि के सहित लीन हो जाती है।
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