इत्थं गते गतघृणः किमयं विधत्तां वध्यस्तवेत्यभिहितो वसुधाधिपेन । एधान्हुताशनवतः स मुनिर्ययाचे पुत्रं परासुमनुगन्तुमनाः सदारः ॥
इस प्रकार कहने पर राजा ने पूछा कि अब वह क्या करे; तब मुनि ने अपने पुत्र के साथ मरने की इच्छा से चिता तैयार करने की अनुमति माँगी।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।