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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 76
तेनावतीर्य तुरगात्प्रथितान्वयेन पृष्टान्वयः स जलकुम्भनिषण्णदेहः । तस्मै द्विजेतरतपस्विसुतं स्खलद्भिरात्मानमक्षरपदैः कथयांबभूव ॥
घोड़े से उतरकर उस प्रसिद्ध वंश के राजा ने उस जलपात्र के पास पड़े तपस्वी बालक से टूटे शब्दों में अपना परिचय दिया।
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