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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 73
कुम्भपूरणभवः पटुरुच्चैरुच्चचार निनदोऽम्भसि तस्याः । तत्र स द्विरदबृंहितशङ्की शब्दपातिनमिषुं विससर्ज ॥
जल भरने की ध्वनि से उत्पन्न ऊँची आवाज को उसने हाथी की गर्जना समझकर उसी दिशा में शब्दवेधी बाण चला दिया।
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