न मृगयाभिरतिर्न दुरोदरं न च शशिप्रतिमाभरणं मधु । तमुदयाय न वा नवयौवना प्रियतमा यतमानमपाहरत् ॥
उसे न शिकार का आकर्षण था, न जुए का, न मदिरा का, न आभूषणों का और न ही नई युवतियाँ उसके कर्तव्य से उसे विचलित कर सकीं।
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