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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 68
तस्य कर्कशविहारसंभवं स्वेदमाननविलग्नजालकम् । आचचाम सतुषारशीकरो भिन्नपल्लवपुटो वनानिलः ॥
उसके कठोर शिकार के कारण चेहरे पर आए पसीने को वन की शीतल हवा ने पत्तों के बीच से आकर सुखा दिया।
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