अन्य मृगों पर बाण चलाने के लिए हाथ उठाते समय भी, भय से चंचल उनकी आँखों को देखकर उसका दृढ़ संकल्प भी ढीला पड़ गया, जैसे प्रिय की आँखों की चंचलता स्मरण हो आए।
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