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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 56
तत्प्रार्थितं जवनवाजिगतेन राज्ञा तूणीमुखोद्धृतशरेण विशीर्णपङ्क्ति । श्यामीचकार वनमाकुलदृष्टिपातैर्वातेरितोत्पलदलप्रकरैरिवार्द्रैः ॥
तेज़ गति से घोड़े पर चलते हुए राजा ने तरकश से बाण निकालकर मृगों की पंक्ति को भंग कर दिया, जिससे वन ऐसे प्रतीत हुआ मानो हवा से बिखरे कमलपत्रों से ढक गया हो।
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