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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 54
अथ नभस्य इव त्रिदशायुधं कनकपिङ्गतडिद्गुणसंयुतम् । धनुरधिज्यमनाधिरुपाददे नरवरो रवरोषितकेसरी ॥
तब वह वीर पुरुष, सिंह के समान तेजस्वी, आकाश में इन्द्र के धनुष की भाँति सुनहरी चमक वाला धनुष उठाकर तैयार हो गया।
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