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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 52
तनुलताविनिवेशितविग्रहा भ्रमरसंक्रमितेक्षणवृत्तयः । ददृशुरध्वनि तं वनदेवताः सुनयनं नयनन्दितकोसलम् ॥
लताओं में विलीन देह और भौंरों जैसी चंचल दृष्टि वाली वनदेवियों ने मार्ग में उस सुन्दर नेत्रों वाले कोसल नरेश को देखा।
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