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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 51
ग्रथितमौलिरसौ वनमालया तरुपलाशसवर्णतनुच्छदः । तुरगवल्गनचञ्चलकुण्डलो विरुरुचे रुरुचेष्टितभूमिषु ॥
वनमाला से जटित मस्तक और पलाश के समान वर्ण वाले वस्त्र धारण किए, घोड़े की गति से हिलते कुंडलों सहित वह राजा वनभूमि में अत्यन्त शोभित हो रहा था।
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