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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 50
मृगवनोपगमक्षमवेषभृद्विपुलकण्ठनिषक्तशरासनः । गगनमश्वखुरोद्धतरेणुभिर्नृसविता स वितानमिवाकरोत् ॥
वन में प्रवेश योग्य वेश धारण कर, विशाल कंधों पर धनुष लटकाए हुए, वह राजा घोड़ों के खुरों से उठी धूल से आकाश को मानो छत्र के समान ढँकता हुआ आगे बढ़ा।
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