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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 47
त्यजत मानमलं बत विग्रहैर्न पुनरेति गतं चतुरं वयः । परभृताभिरितीव निवेदिते स्मरमते रमते स्म वधूजनः ॥
मान-अपमान को त्याग दो, क्योंकि बीता हुआ यौवन लौटकर नहीं आता—ऐसा मानो कोयल की ध्वनि से प्रेरित होकर स्त्रियाँ प्रेम में लीन हो गईं।
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