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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 46
अनुभवन्नवदोलमृतूत्सवं पटुरपि प्रियकण्ठजिघृक्षया । अनयदासनरज्जुपरिग्रहे भुजलतां जलतामबलाजनः ॥
वसंत के झूला उत्सव का अनुभव करते हुए भी, प्रिय के गले से लिपटने की इच्छा से स्त्रियाँ अपनी भुजाओं को लताओं की तरह आसन की रस्सियों पर ले गईं।
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