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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 42
अमदयन्मधुगन्धसनाथया किसलयाधरसंगतया मनः । कुसुमसंभृतया नवमल्लिका स्मितरुचा तरुचारुविलासिनी ॥
मधु की सुगंध और कोमल पत्तों के स्पर्श से युक्त नवमल्लिका, अपनी मुस्कान जैसी शोभा से वृक्षों को सुसज्जित कर मन को मोहित कर रही थी।
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