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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 40
हुतहुताशनदीप्ति वनश्रियः प्रतिनिधिः कनकाभरणस्य यत् । युवतयः कुसुमं दधुराहितं तदलके दलकेसरपेशलम् ॥
वन की शोभा अग्नि के समान दीप्तिमान थी और युवतियों ने अपने केशों में कोमल केसरयुक्त पुष्प धारण कर उन्हें स्वर्णाभूषण के समान सजा लिया।
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