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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 38
उपययौ तनुतां मधुखण्डिता हिमकरोदयपाण्डुमुखच्छविः । सदृशमिष्टसमागमनिर्वृतिं वनितयानितया रजनीवधूः ॥
चन्द्रमा के उदय से रात्रि का मुख फीका हो गया, जैसे प्रिय से मिलकर स्त्री संतुष्ट होकर शांत हो जाती है।
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