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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 37
शुशुभिरे स्मितचारुतराननाः स्त्रिय इव श्लथशिञ्जितमेखलाः । विकचतामरसा गृहदीर्घिका मदकलोदकलोलविहंगमाः ॥
ढीली मेखलाओं और मधुर मुस्कान से युक्त स्त्रियों के समान, खिले कमलों से भरे सरोवर और उनमें चंचल पक्षी अत्यन्त सुन्दर लग रहे थे।
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