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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 36
ललितविभ्रमबन्धविचेक्षणं सुरभिगन्धपराजितकेसरम् । पतिषु निर्विविशुर्मधुमङ्गनाः स्मरसखं रसखण्डनवर्जितम् ॥
ललित चेष्टाओं और सुगंधित वातावरण में स्त्रियाँ अपने पतियों के साथ प्रेम में लीन हो गईं, जहाँ कामदेव का प्रभाव पूर्ण रूप से विद्यमान था।
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