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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 33
अभिनयान्परिचेतुमिवोद्यता मलयमारुतकम्पितपल्लवा । अमदयत्सहकारलता मनः सकलिका कलिकामजितामपि ॥
मलय पवन से हिलते पत्तों वाली आम की लताएँ मानो अभिनय करने को तत्पर थीं और उन्होंने सबके मन को मोहित कर लिया।
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