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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 30
सुवदनावदनासवसंभृतस्तदनुवादिगुणः कुसुमोद्गमः । मधुकरैरकरोन्मधुलोलुपैर्बकुलमाकुलमायतपङ्क्तिभिः ॥
सुगंधित पुष्पों का प्रस्फुटन मानो सुन्दर मुखों के समान था, जिसे मधु के लोभी भौंरों ने घेरकर बकुल वृक्षों को गुंजार से भर दिया।
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