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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 28
कुसुममेव न केवलमार्तवं नवमशोकतरोः स्मरदीपनम् । किसलयप्रसवोऽपि विलासिनां मदयिता दयिताश्रवणार्पितः ॥
केवल फूल ही नहीं, बल्कि अशोक वृक्ष के नए पत्ते भी प्रेम को उद्दीप्त करने वाले थे, जिन्हें प्रिय के कानों में सजाकर विलासिनी स्त्रियाँ आनंदित होती थीं।
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