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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 22
अवभृथप्रयतो नियतेन्द्रियः सुरसमाजसमाक्रमणोचितः । नमयति स्म स केवलमुन्नतं वनमुचे नमुचेररये शिरः ॥
अवभृथ स्नान के समय इन्द्रियों को संयमित रखते हुए, देवताओं के योग्य आचरण करने वाला वह राजा केवल दुष्टों के सिर ही झुकाता था।
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