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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 21
अजिनदण्डभृतं कुशमेखलां यतगिरं मृगश‍ृङ्गपरिग्रहाम् । अधिवसंस्तनुमध्वरदीक्षितामसमभासमभासयदीश्वरः ॥
अजिन, दण्ड, कुश की मेखला और मृगशृंग धारण कर, संयमित वाणी वाला वह राजा यज्ञ में दीक्षित होकर अपने तपस्वी रूप से भी तेजस्वी प्रतीत हुआ।
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