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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 20
क्रतुषु तेन विसर्जितमौलिना भुजसमाहृतदिग्वसुना कृताः । कनकयूपसमुच्छ्रयशोभिनो वितमसा तमसासरयूतटाः ॥
उसने यज्ञों में अपना मुकुट उतारकर और दिशाओं से धन एकत्र कर स्वर्ण यूपों से युक्त यज्ञ किए, जिससे सरयू के तट अंधकाररहित होकर प्रकाशित हो उठे।
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