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रघुवंशम् • अध्याय 9 • श्लोक 12
शमितपक्षबलः शतकोटिना शिखरिणां कुलिशेन पुरंदरः । स शरवृष्टिमुचा धनुषा द्विषां स्वनवता नवतामरसाननः ॥
जैसे इन्द्र वज्र से पर्वतों के पक्ष काट देता है, वैसे ही उसने अपने धनुष से बाणों की वर्षा कर शत्रुओं के बल को नष्ट कर दिया और उसका मुख प्रसन्न कमल के समान दमकने लगा।
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