उस उदार बुद्धि वाले गुरु के वचन को स्वीकार कर उसने मुनि को विदा किया, परन्तु शोक से भरे उसके हृदय में वे वचन ऐसे लौट आए मानो गुरु फिर से निकट आ गए हों।
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