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रघुवंशम् • अध्याय 8 • श्लोक 84
उदये मदवाच्यमुज्झता श्रुतमाविष्कृतमात्मवत्त्वया । मनसस्तदुपस्थिते ज्वरे पुनरक्लीबतया प्रकाश्यताम् ॥
तुमने पहले जो उचित वचन कहे थे, अब उन्हें पुनः स्मरण करो और अपने मन के इस शोक रूपी ज्वर को दूर कर धैर्य धारण करो।
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