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रघुवंशम् • अध्याय 8 • श्लोक 83
तदलं तदपायचिन्तया विपदुत्पत्तिमतामुपस्थिता । वसुधेयमवेक्ष्यतां त्वया वसुमत्या हि नृपाः कलत्रिणः ॥
अब उसके वियोग के शोक में डूबे रहने से क्या लाभ? इस पृथ्वी की ओर ध्यान दो, क्योंकि राजा के लिए पृथ्वी ही उसकी पत्नी के समान होती है।
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