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रघुवंशम् • अध्याय 8 • श्लोक 80
स तपःप्रतिबन्धमन्युना प्रमुखाविष्कृतचारुविभ्रमम् । अशपद्भव मानुषीति तां शमवेलाप्रलयोर्मिणा भुवि ॥
उस ऋषि ने तप भंग होने के क्रोध से उस सुन्दर चेष्टाओं वाली अप्सरा को शाप दिया—तू मनुष्य बन जा—और वह पृथ्वी पर आ गई।
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