विलपन्निति कोसलाधिपः करुणार्थग्रथितं प्रियां प्रति । अकरोत्पृथिवीरुहानपि स्रुतशाखारसबाष्पदूषितान् ॥
इस प्रकार विलाप करते हुए कोसलाधिपति ने अपनी प्रिया के लिए करुण शब्द कहे, जिनसे वृक्ष भी अपने रस रूपी आँसुओं से भीग गए।
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