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रघुवंशम् • अध्याय 8 • श्लोक 68
मदिराक्षि मदाननार्पितं मधु पीत्वा रसवत्कथं नु मे । अनुपास्यसि बाष्पदूषितं परलोकोपनतं जलाञ्जलिम् ॥
हे मदिराक्षि! मेरे हाथों से दिया हुआ मधुर रस पीने के बाद, अब तुम मेरे आँसुओं से भरे जलांजलि को स्वीकार किए बिना ही कैसे चली गई?
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