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रघुवंशम् • अध्याय 8 • श्लोक 63
स्मरतेव सशब्दनूपुरं चरणानुग्रहमन्यदुर्लभम् । अमुना कुसुमाश्रुवर्षिणा त्वमशोकेन सुगात्रि शोच्यसे ॥
तुम्हारे चरणों के स्पर्श से झंकारते नूपुरों को यह अशोक वृक्ष मानो याद कर रहा है और अपने फूलों के आँसू बहाकर तुम्हारे लिए शोक प्रकट कर रहा है।
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