त्रिदिवोत्सुकयाप्यवेक्ष्य मां निहिताः सत्यममी गुणास्त्वया । विरहे तव मे गुरुव्यथं हृदयं न त्ववलम्बितुं क्षमाः ॥
हे स्वर्ग जाने की इच्छुक! तुमने अपने ये सभी गुण मुझमें ही रख दिए हैं, पर तुम्हारे वियोग में मेरा हृदय इस भारी पीड़ा को सहने में असमर्थ है।
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