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रघुवंशम् • अध्याय 8 • श्लोक 6
अधिकं शुशुभे शुभंयुना द्वितयेन द्वयमेव संगतम् । पदमृद्धमजेन पैतृकं विनयेनास्य नवं च यौवनम् ॥
अज द्वारा प्राप्त पैतृक राज्य और उसके विनययुक्त नवीन यौवन—इन दोनों के मिलन से उसकी शोभा और भी बढ़ गई।
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