रघुमेव निवृत्तयौवनं तममन्यन्त नवेश्वरं प्रजाः । स हि तस्य न केवलां श्रियं प्रतिपेदे सकलान्गुणानपि ॥
प्रजा ने वृद्ध हो चुके रघु के स्थान पर उसे नया राजा माना, क्योंकि उसने केवल राज्य ही नहीं, बल्कि उनके सभी गुणों को भी ग्रहण किया था।
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