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रघुवंशम् • अध्याय 8 • श्लोक 45
अथवा मृदु वस्तु हिंसितुं मृदुनैवारभते प्रजान्तकः । हिमसेकविपत्तिरत्र मे नलिनी पूर्वनिदर्शनं मता ॥
या फिर, कोमल वस्तु को नष्ट करने के लिए मृत्यु भी कोमल उपाय ही अपनाती है; जैसे कमलिनी के लिए शीत का स्पर्श ही विनाश का कारण होता है।
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